कीव : साइबर हमलावरों ने यूक्रेन की कई सरकारी वेबसाइट को निशाना बनाया. तत्काल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन हमलों के पीछे कौन है, लेकिन ये हमले ऐसे समय पर किए गए हैं जब मॉस्को और अन्य पश्चिमी देशों के बीच इस सप्ताह हुई वार्ता में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं होने के बाद यूक्रेन और रूस के बीच तनाव बढ़ गया है.
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ओलेग निकोलेंको ने शुक्रवार को ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस हमले के पीछे कौन है. उन्होंने कहा, ‘किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी क्योंकि मामलों की जांच चल रही है लेकिन यूक्रेन के खिलाफ रूस के साइबर हमले का लंबा इतिहास रहा है.’
अधिकारियों के अनुसार, देश की कैबिनेट, सात मंत्रालयों, कोषागार, राष्ट्रीय आपदा सेवा और पासपोर्ट तथा टीकाकरण प्रमाण पत्र संबंधी राज्य सेवा की वेबसाइट हैकिंग की वजह से उपलब्ध नहीं हैं. खबरों के मुताबिक, हैकरों ने विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर यूक्रेनी, रूसी और पोलिश भाषा में एक संदेश छोड़ा. संदेश के एक अंश में कहा गया कि यूक्रेन का डेटा सार्वजनिक डोमेन में लीक कर दिया गया है. डरो और सबसे बुरे की उम्मीद करो. यह आपके अतीत, वर्तमान और भविष्य के लिए है.
हालांकि, इस संबंध में यूक्रेन की स्टेट सर्विस ऑफ स्पेशल कम्युनिकेशन एंड इंफॉर्मेशन प्रोटेक्शन ने कहा कि कोई भी व्यक्तिगत डेटा लीक नहीं हुआ है. देश के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्री, मायखाइलो फेडोरोव ने शुक्रवार को बाद में कहा कि प्रभावित वेबसाइट्स में अधिकांश हैकर्स से मुक्त करा ली गई हैं.
बता दें कि दिसंबर, 2021 में यूक्रेन के रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेजनिकोव ने कहा था कि रूस ने सीमाओं के पास 94 हजार से अधिक सैनिकों को तैनात किया है. रेजनिकोव ने शुक्रवार को सांसदों को बताया कि यूक्रेन की सीमा के पास और रूसी कब्जे वाले क्रीमिया में रूसी सैनिकों की संख्या 94,300 होने का अनुमान है.
पश्चिमी देशों का रूस पर आरोप
यूक्रेन से सटी सीमा के पास रूस द्वारा अपने सैनिकों को तैनात करने की हाल में यूक्रेन समेत कई पश्चिमी देशों ने आलोचना की थी. इन देशों ने आशंका जताई है कि रूस यूक्रेन पर हमला कर सकता है. रूस ने यूक्रेन और पश्चिमी देशों के इन दावों को खारिज करते हुए यूक्रेन पर ही आक्रामक होने का आरोप लगाया है.









