महादेव के भूतों की टोली ने बनाया था ये मंदिर, जानिए इसका रहस्य

मुरैना: शास्त्रों की बात ,जानें धर्म के साथ सनातन धर्म के ग्रंथों में 33 कोटि देवी-देवताओं का वर्णन किया गया है। प्रत्येक देवी-देवताओं के अनन्य भक्त है। परंतु बात अगर शिव शंकर की जिन्हें देवताओं के प्रमुख कहलाते हैं, संहारकर्ता कहलाते हैं, तो इनके भक्तों की गिनती सबसे अधिक है। शास्त्रों में इन्हें महादेव, रूद्र, शंकर, शिवा, महेश्वर, भोलेनाथ जैसे अन्य कई नामों से बुलाया जाता है। तो वहीं इन्हीं नामों से जुड़े देशभर में कई प्राचीन मंदिर हैं। बल्कि दुनियाभर में इनसे संबंधित इतने मंदिर हैं कि शायद इसकी गिनती करना मुश्किल हो जाए, इन्हीं में से एक मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। जी हां, जिस मंदिर की बात हम कर रहे हैं उसे ककनमठ मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि इस मंदिर का निर्माण देवी-देवताओं ने ही बल्कि किसी समय में भूत-प्रेतों ने किया था।

क्या आप ये सुनकर चौंक गए, चौंकेंगे भी क्यों नहीं, इस मंदिर से जुड़ी ये जानकारी है ही अनोखी। आज तक हमने भी आपको ऐसे कई शिव मंदिरों के बारे मेंं बताया है जिनका निर्माण राजा-महाराजा, देवताओं और इंसानों ने किया था। लेकिन ये बात बोलने में ही क्या विचार करने पर भी बड़ी अजीब लगती है कि किसी मंदिर का निर्माण भूत-प्रेतों ने किया हो। परंतु ये सत्य है। जी हां, मान्यता के अनुसार ककनमठ मंदिर जो शिव जी को समर्पित है। इसका निर्माण भूतों ने किया था। यह मंदिर मुरैना ज़िले के सिहोनियां गांव में स्थित है।

मान्यता है कि इस मंदिर को भूतों ने एक ही रात में बनाया था। इसे बनाते-बनाते सुबह हो गई और भूतों को काम अधूरा छोड़कर जाना पड़ा। आज भी इस मंदिर को देखने पर यही लगता है कि इसका निर्माण अधूरा है।

इस मंदिर की सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि मंदिर के निर्माण में मिट्टी, सीमेंट और चूने का प्रयोग नहीं किया गया है। बल्कि मंदिर पत्थर की बड़ी-बड़ी शिलाओं से बना है। यहां की एक और खास बात यह है कि इस मंदिर में लगे पत्थर दूर-दूर तक नहीं मिलते। ये मंदिर देखने में जितना बाहर से सुंदर दिखाई देता उतना ही अंदर से। भारत से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग इस मंदिर को देखने आते हैं। सोमवार के दिन यहां भक्तों की भीड़ ज्यादा देखने को मिलती है। बताया जाता है कि इस मंदिर के चारों तरफ़ खंभे बने हुए हैं। लोगों का मानना है कि इन खंभो की गिनती आज तक कोई नहीं कर पाया। मंदिर से जुड़े यही रहस्य इसे बेहज खास और रहस्यमयी बनाते हैं।

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