ऋषि पंचमी का पर्व शनिवार को श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाएगा। मान्यता है कि ऋषि पंचमी पर विशेष पूजन करने से अंजाने में हुए पापों के कुप्रभावों से मनुष्य को मुक्ति मिलती है। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि ऋषि पंचमी का दिन एक शुभ त्योहार के रूप में मनाया जाता है। पंचमी तिथि 11 सितंबर को शाम 07:37 बजे तक रहेगी। ऋषि पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:03 बजे से दोपहर 01:32 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:19 बजे तक रहेगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी को सप्त ऋषि पूजन व्रत का विधान है। यह दिन हमारे पौराणिक ऋषि-मुनियों के पूजन के लिए खास माना गया है। ब्रह्म पुराण के अनुसार इस दिन चारों वर्ण की स्त्री व पुरुषों को यह व्रत करना चाहिए।
यह व्रत जाने-अनजाने में हुए पापों को दूर करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। हिन्दू धर्म में स्त्रियों द्वारा बहुत से नियमों का पालन किया जाता है। अगर किसी कारणवश कोई भूलचूक हो जाती है, तो महिलाओं को दोष मुक्त करने के लिए ऋषि पंचमी का व्रत किया जाता है। इस दिन भक्त सात महान संतों के सप्तऋषि की पूजा करते हैं जो सभी अनुष्ठानों के अंतिम पहलू का अंतिम भाग होता है। सभी सात ऋषियों की उपस्थिति का आह्वान करने के लिए, प्रार्थनाओं और कई पवित्र चीजें जैसे फूल और खाद्य उत्पादों की पेशकश की जाती है। महान सप्तर्षि के नाम वशिष्ठ, जमदग्मी, गौथमा, विश्वमित्र, भारद्वाजा, अत्री और कश्यप हैं।









