कोरोना की दूसरी लहर से चालू वित्त वर्ष में तेज विकास दर की उम्मीदों को लगा झटका

नई दिल्ली ।

कोरोना की दूसरी लहर ने चालू वित्त वर्ष (2021-22) के दौरान तेज विकास दर की उम्मीदों को झटका दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष के लिए जीडीपी विकास दर के 10.5 फीसद अनुमान को घटाकर 9.5 फीसद कर दिया है। शुक्रवार को मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करते हुए आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास ने किसी भी तरह की नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। लेकिन इस बात की पूरी व्यवस्था की है कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त राशि रहे, ताकि सभी को कर्ज मिल सके।

इसके लिए बैंक ने कोरोना की दूसरी लहर से सबसे अधिक संकटग्रस्त चुनिंदा सेक्टरों को 15,000 करोड़ रुपये के कर्ज की व्यवस्था की है। आरबीआइ गवर्नर ने महंगाई को लेकर भी चिंता जताई है, लेकिन इकोनॉमी की स्थिति को देखते हुए संकेत दिया है कि अभी ब्याज दरों को नीचे की तरफ रखने की कोशिश जारी रहेगी।

आरबीआइ की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बुधवार से चल रही बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए आरबीआइ गवर्नर ने कहा कि पिछले वर्ष की तरह इस बार देशव्यापी लॉकडाउन नहीं है। लेकिन स्थानीय स्तर पर विभिन्न तरह के प्रतिबंधों से भी सभी तरह की गतिविधियां कई हफ्तों तक ठप रही हैं। अप्रैल-मई, 2021 में शहरी क्षेत्रों में बिजली खपत, रेलवे ढुलाई, स्टील खपत, सीमेंट उत्पादन, ई-वे बिल्स, टैक्स वसूली कम हुई है।

सभी तरह की मैन्यूफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी मांग पर असर पड़ा है। इन हालातों को ध्यान में रखते हुए आरबीआइ ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 18.5 फीसद, दूसरी में 7.9 फीसद, तीसरी में 7.2 फीसद और चौथी तिमाही में 6.6 फीसद विकास दर का अनुमान लगाया है। आरबीआइ सरकार को टीकाकरण को गति और निर्यात को बढ़ावा देने वाली नीतियों को अपनाने का सुझाव दिया है।

आरबीआइ ने चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर 5.1 फीसद रहने की उम्मीद जताई गई है। आरबीआइ अभी महंगाई दर को चार फीसद (दो फीसद ऊपर या नीचे) के आसपास रखने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। संवाददाताओं से बातचीत में डॉ. दास ने कच्चे तेल की कीमतों व अंतरराष्ट्रीय बाजार में धातुओं की बढ़ती कीमतों को लेकर खास तौर पर चिंता जताई जिसका असर खुदरा महंगाई पर पड़ने की संभावना है।

दास ने कहा कि हम बेहतर की उम्मीद लगाए हुए हैं, मगर सबसे खराब दौर के लिए भी उतने ही तैयार हैं। उद्योग जगत ने भी आरबीआइ से कहा है कि उसे ब्याज दरों को और कम करने के उपाय करने चाहिए। उल्लेखनीय है कि मार्च, 2020 के बाद केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 115 आधार अंकों की कमी की थी जिससे अभी होम लोन, ऑटो लोन व औद्योगिक लोन सर्वकालिक निचले स्तर पर हैं।

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