भारतीय रिजर्व बैंक ने एक नियम में बदलाव किया है। अब भुगतान बैंकों में ग्राहक एक दिन में अधिकतम दो लाख रुपए जमा कर सकेंगे। इससे पहले लिमिट एक लाख रुपए थी। सूक्ष्म, लघु एंव मझोले उद्यमों, छोटे व्यापारियों समेत कस्टमरों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को मॉनिट्री पॉलिसी कमेटी की एक बैठक की। जिसके बाद उन्होंने इसकी घोषणा की थी।
आरबीआई ने जारी किया सर्कुलर
आरबीआई ने एक सर्कुलर जारी किया है। जिसमें कहा है कि भुगतान बैंकों की वित्तीय समावेश के क्षेत्र में प्रगति और कार्य में लचीलापन लाने के लिए किया गया है। ग्राहक अधिकतम राशि रखने की सीमा एक लाख रुपए से बढ़ाकर दो रुपए किया जाने का निर्णय लिया गया है। अकाउंट में रकम रखने की सीमा दोगुनी करने का निर्णय बैंकों के कामकाज की समीक्षा पर लिया गया है। बता दें देश में करीब 6 भुगतान बैंक हैं।
आरटीजीएस और एनईएफटी के लिए बैंकों की जरूरत नहीं
अब ग्राहकों को आरटीजीएस और एनईएफटी के जरिए लेनदेन करने के लिए बैंकों के ऊपर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ये सुविधा नॉन बैंकिंग पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर्स भी दे सकेंगे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कहा है कि इस सर्विस को बढ़ाने से वित्तीय सिस्टम में सेटलमेंट जोखिम को कम करने में सहायता होगी। वहीं डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा। गौरतलब है कि साल 2019 में आरबीआई ने आरटीजीएस और एनईएफटी के शुल्क को खत्म कर दिया था।
लोन पर मोरेटोरियम देने से इनकार
कोरोना के बढ़ते केस और लॉकडाउन के बावजूद गवर्नर शक्तिकांत दास ने लोन पर मोरेटोरियम देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर कोई कदम उठाया जाएगा। आरबीआई ने पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान राहत पैकेज दिया था। जिसमें कर्जदारों को कर्ज किस्त के भुगतान पर रोक लगा दी थी। पहले एक मार्च से 31 मई तक छूट दी गई थी। इस रोक को तीन महीने और बढ़ाकर 31 अगस्त तक कर दिया गया था।







