किरण बेदी को मिल सकता है ‘कोविड-19 मंत्रालय’ का जिम्मा

नई दिल्ली । पुडुचेरी की उप राज्यपाल किरण बेदी को दिल्ली वापस बुलाए जाने की चर्चाएं हैं। सूत्रों के अनुसार वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर अलग मंत्रालय का गठन हो सकता है, साथ ही बेदी को इसका जिम्मा दिया जा सकता है। पुडुचेरी के उप राज्यपाल का जिम्मा किसी और नेता को दिया जा सकता है। देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि, मरीजों के ठीक होने की दर भी बढ़ रही है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों के चलते संकट अभी भी बरकरार है। ऐसे में सामाजिक कार्यकर्ता ओर सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बेदी को अगर सरकार दिल्ली बुलाती है तो उनके सामने भी कई चुनौतियां होंगी। एक सवाल यह भी है कि अगर किरण बेदी को दिल्ली बुलाया जाता है तो पुडुचेरी के उपराज्यपाल की कुर्सी पर कौन बैठेगा। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि बेदी के बाद यह जिम्मेदारी भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद एल गणेशन को दी जा सकती है। बेदी को पूरे देश में कोरोना की रोकथाम के लिए की जा रही कार्रवाइयों और गतिविधियों के नेतृत्व का जिम्मा दिया जा सकता है। कहा यह भी जा रहा है कि उन्हें कोविड-19 से संबंधित सभी मामलों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के लिए अधिकारी (एसपीओसी) नियुक्त किया जा सकता है। सत्ता के गलियारों में इस तरह की सुगबुगाहट के पीछे एक कारण पुडुचेरी में बेदी का विरोध होना भी हो सकता है। हाल ही में पुडुचेरी के कई डॉक्टर और नर्स समेत स्वास्थ्य कर्मी बेदी के विरोध में उतर आए थे और उनसे माफी की मांग की थी। इसे लेकर डॉक्टर और नर्स काली पट्टी बांधकर सड़कों पर भी उतर आए थे। 
दरअसल, बीते दिनों बेजी कोविड-19 के विशेष प्रकोष्ठ का निरीक्षण करने गई थीं। इस दौरान वह स्वास्थ्यकर्मियों से उलझ गई थीं। कर्मियों ने आरोप लगाया था कि बेदी ने उनसे दुर्व्यवहार किया था और धमकी भरे लहजे में बात की थी। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रदर्शन करते हुए बेदी से माफी मांगने की मांग की थी। अगर केंद्र सरकार बेदी को दिल्ली बुलाने का फैसला लेती है तो इसके पीछे का एक कारण बेदी और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री नारायण सामी के संबंधों में खटास भी हो सकती है। दोनों के बीच लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे कई मौके आए हैं जब मुख्यमंत्री और बेदी ने एक दूसरे के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां भी की हैं। वहीं, हाल ही में नारायणसामी ने बिना उप राज्यपाल की अनुमति के केंद्रशासित प्रदेश के लिए वर्ष 2020-21 का बजट पेश किया था। विधानसभा में उप राज्यपाल का पारंपरिक अभिभाषण भी नहीं हुआ था। इसे बेदी ने अवैध और अनियमित कहा था।  बेदी ने कहा था कि मुख्यमंत्री जो कर रहे हैं वह पूरी तरह अवैध है।

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