अजीत जोगी का हुआ निधन, जानिए उनका सियासत भरा सफर

रायपुर: पूर्व नौकरशाह और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी अब हमारे बीच नहीं रहे । वे नौकरशाही में।संवेदनशील परंपरा के अफसर थे और सियासत में सामाजिक यांत्रिकीय को मजबूत करने वाले । उनकी यह तकनीक इतनी कारगर हुई कि अर्जुन सिंह के सशक्त सियासी कुनबे,जिसमे एक से एक यानी दिग्विजय सिंह ,सुभाष यादव आदि दिग्गज नेताओं की मौजूदगी के बावजूद अपना बजूद बनाने में कामयाब रहे । यह वजूद इतना व्यापक और प्रभावी हुआ कि दूरस्थ छत्तीसगढ़ का यह आदिवासी नेता शहडोल जैसी सीट से सांसद बन गया
कहते है कि जब राजीव गांधी पायलट की नौकरी करते थे तब जोगी इन्दौर कलेक्टर थे । राजीव गांधी का वहां आना- जाना था । इसी दौरान उनकी गांधी की मुलाकातें हुई और जीवंत संपर्क रखने वाले जोगी ने सदैव उन्हें जीवित रखा जो उन्हें सियासत तक ले गई।
राजनीति में आते ही जोगी ने मध्यप्रदेश में अपने पांव पसारे । वे सामजिक संगठनों के जरिये ऐसे युवाओं को जोड़ने में जुटे जिन्हें राजनीति का ककहरा भी नही पता था ।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण ये है कि छत्तीसगढ़ में पैदा हुए जोगी का ग्वालियर अंचल से महज इतना रिश्ता था कि वे आईएएस के अपने प्रोवेशन काल मे प्रशिक्षु अधिकारी के तौर पर कुछ महीनों पदस्थ रहे लेकिन जब उन्होंने राजनीति की राह पकड़ी तो भिण्ड जैसे दूरस्थ जिले में भी उनके हजारों युवा समर्थक नब्बे के दशक में थे । उंन्होने जोगी ब्रिगेड बना रखी थी और इसी के द्वारा खंडा रोड भिण्ड पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में श्री जोगी जी सामिल हुए । ये 1995 की बात है ।

बाद में छत्तीसगढ़ अलग हो गया । वे वहां के पहले मुख्यमंत्री बने । श्री जोगी एक्सीडेंट के बाद भी पूरी जिजीविषा के साथ काम कर रहे थे ।
अजित जोगी जुझारू और बड़े जीवट वाले व्यक्ति थे । वे संघर्ष का रास्ता चुनते थे यही वजह है कि दुर्घटना के बाद वे शारीरिक रूप से असहाय होने के बावजूद उन्होंने उससे हालात में अपने संघर्ष के रास्ते खोजे । अपने लिए विशेष किस्म का वाहन डिजायन कराया और पूरी ताकत के साथ न केवल जीवट के साथ खड़े रहे बल्कि अपनी सियासत को भी जीवित रखे रहे । हालांकि हालातो के चलते उनके आखिरी दिन सियासत के लिहाज से चमकदार नही रहे । उन्हें अपनी मातृ संस्था कांग्रेस से अलग होना पड़ा । उनके द्वारा बनाई गई क्षेत्रीय पार्टी छत्तीसगढ़ में कोई निर्णायक भूमिका में अपने आपको खड़ी नही कर पाई बावजूद इसके श्री जोगी की जीवंतता और संघर्ष की प्रवृति के कारण वे छत्तीसगढ़ की आबोहवा के लिए अंतिम सांस तक अपरिहार्य बने रहे ।
विनम्र श्रद्धांजलि।

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