देवों के देव महादेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि का अपना एक अलग ही महत्व है। महाशिवरात्रि पर जहां प्रयागराज कुंभ का अंतिम स्नान रहेगा, वहीं काशी विश्वनाथ इस बार 45 मिनट पहले ही जाग जाएंगे। जिसे लेकर नागा साधुओं ने काशी में अपना डेरा डाल लिया है। इन दिनों विदेशी सैलानियों के लिए वाराणसी के घाटों पर नागा साधु आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
महाशिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ के दर्शन पूजन के लिए देश विदेश से श्रद्धालु और साधु-संत आते हैं। इसको लेकर मंदिर में तैयारियां शुरू हो गईं हैं। एक ओर जहां छत्ताद्वार गेट नंबर चार पर नया प्रवेशद्वार बनाया गया है, वहीं मंदिर में आने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिग-जैग भी बनया जा रहा है।
इस बार महाशिवरात्रि पर बाबा काशी विश्वनाथ 45 मिनट पहले जागेंगे और भक्तों को दर्शन देंगे। शिवरात्रि पर विशेष आरती भी की जाएगी। इसको लेकर मंदिर प्रशासन ने भक्तों के लिए समय सारिणी जारी की है। जिसमें आरती का समय 45 मिनट पहले कर दिया गया है। इसके अलावा प्रवेशद्वार पर नया गेट भी बनाया गया है। महाशिवरात्रि पर अखाड़ों के साधु संत भी दर्शन पूजन करेंगे।
मंदिर के नियम के अनुसार मंगला आरती तड़के तीन बजे से शुरू होती है, लेकिन शिवरात्रि के दिन भोर में 2:15 बजे से शुरू होकर 3 बजकर 15 मिनट तक चलेगी। जबकि 3:30 बजे से मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। मध्याह्न आरती 12 बजे से 12:30 तक चलेगी। शिवरात्रि के दिन होने वाली चारों प्रहर की विशेष आरती की जाएगी।
बता दें कि इसके पहले कुंभ के पलट प्रवाह से कल्पवास करने वाले साधु-संत भोलेनाथ की नगरी काशी में आए हुए हैं। इसी क्रम में पंचदशनाम जूना अखाड़े ने 27 फरवरी को पेशवाई निकाली। इसमें खिचड़ी दही खाकर जूना अखाडा़ के संत बैजनत्था से जहां संत हनुमान घाट स्थित जूना अखाड़ा पहुंचे थें। वहीं कबीरचौरा से आवाहन अखाड़े के संत दशाश्वमेध घाट पर पहुंचे थे।
बैंड बाजा और रथों पर सवार होकर संत निकले, इस यात्रा के दौरान संत करतम दिखाते हुए चल रहे थे, जो काफी आकर्षण का केन्द्र रहा। ये संत काशी में होली तक रहेंगे। इस बीच महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन करेंगे।









