वित्त मंत्री सीतारमण ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण किया पेश

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट से एक दिन पहले संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 पेश कर दिया. आर्थिक सर्वेक्षण में देश की आर्थिक विकास दर वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 6-6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है. आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि बीते साल में आर्थिक मोर्चे पर देश का क्‍या हाल रहा. आर्थिक सर्वे के जरिए मुख्य आर्थिक सलाहकार सरकार को सुझाव भी देते हैं, ताकि इकोनॉमी के लक्ष्यों को हासिल किया जा सके. आइए जानते हैं आर्थिक सर्वेक्षण की बड़ी बातें.

आर्थिक सर्वेक्षण में देश की जीडीपी ग्रोथ वित्‍त वर्ष 2020-21 के लिए 6-6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. वहीं वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी रह सकती है. यह 11 साल में सबसे कम होगी. इससे पिछले वित्‍त वर्ष के दौरान 6.8 फीसदी था. आर्थिक सर्वेक्षण में बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव के संकेत मिले हैं. एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम आदमी को इनकम टैक्स में राहत दे सकती हैं. साथ ही इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर में निवेश बढ़ाने वाली घोषणाएं कर सकती है. मौजूदा टैक्स स्लैब में 2.5 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता, जबकि 2.50 लाख से 5 लाख रुपये तक पर 5 फीसदी टैक्स देना होता है. इसके बाद 5 से 10 लाख तक पर 20 फीसदी टैक्स लगता है और उससे ऊपर की आमदनी पर यह 30 फीसदी है. 

मुख्‍य आर्थिक सलाहकारकृष्‍णमूर्ति सुब्रमण्‍यन ने वित्त वर्ष 2020-21 में कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र में 2.8 फीसदी ग्रोथ का भरोसा जताया है. मौजूदा वित्‍त वर्ष के लिए यह अनुमान 2.9 फीसदी रखा गया है. साथ ही उन्‍होंने 2019-20 में इंडस्‍ट्रीयल ग्रोथ के 2.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. सर्वे में कहा गया है कि साल 2014 से देश में महंगाई की दर काबू में है. ज्‍यादातर खाने-पीने की चीजों की कीमतो में 2014 से 2019 के बीच कमी आई है.

कृष्‍णमूर्ति ने कहा कि ग्‍लोबल सेंटीमेंट लगातार भारत के पक्ष में हैं. आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत में वर्ष 2014 से ही महंगाई निरंतर घटती जा रही है. हालांकि, हाल के महीनों में महंगाई में वृद्धि का रुख देखा गया है. उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक पर आधारित मुख्‍य महंगाई दर वर्ष 2018-19 के 3.7 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2019-20 की समान अवधि में 4.1 प्रतिशत हो गई है. थोक मूल्‍य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर में वर्ष 2015-16 और वर्ष 2018-19 के बीच की अवधि के दौरान वृद्धि दर्ज की गई है. हालांकि, डब्‍ल्‍यूपीआई पर आधारित महंगाई दर वर्ष 2018-19 की अप्रैल-दिसम्‍बर 2018 अवधि के 4.7 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2019-20 की समान अवधि में 1.5 प्रतिशत रह गई. 

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक खाड़ी देशों में तनाव के कारण कच्‍चे तेल की कीमतों पर असर पड़ा. इससे वित्त वर्ष 2021 में पेट्रोलियम सब्सिडी पर असर पड़ेगा. ऐसा होने पर रसोई गैस सिलेंडर महंगा हो सकता है. वहीं, फूड सब्सिडी पर काबू पाने पर सरकार का जोर है. सर्वे में कहा गया है कि अगर घरों की बिक्री बढ़ती है तो बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों को फायदा मिलेगा. रियल एस्टेट कंपनियों को कीमत घटानी चाहिए.

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